#students protest continues ; राजनीतिक नाटक कर रहे धर्मेंद्र प्रधान, छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी।

July 29, 2026

By இரா. தேவேந்திரன்.

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जे.बी. पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार कार्य किया। उनका पहला और दूसरा कार्यकाल 1980 से 1989 तक तथा तीसरा कार्यकाल 1995 से 1999 तक रहा। इसके बाद उन्होंने असम के राज्यपाल के रूप में भी सेवा दी। 1997 में ली गई धर्मेंद्र प्रधान की एक पुरानी तस्वीर।

1997 में, जब जे.बी. पटनायक ओडिशा के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आया। उस समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा सरकार और जे.बी. पटनायक सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया।

इसी आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान पहली बार व्यापक रूप से लोगों के बीच पहचाने गए। जिस प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर उन्होंने कभी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था, उसी तरह कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में आज उनके इस्तीफे की मांग उठ रही है। वर्तमान में आंदोलन कर रहे छात्र इन दोनों घटनाओं की तुलना कर रहे हैं।

राजनीतिक नाटक

वर्तमान में प्रदर्शन कर रहे कई छात्र केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की ही नहीं, बल्कि उनकी गिरफ्तारी की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही, कुछ लोगों का कहना है कि जिस तरह तमिलनाडु में राजनीतिक परिवर्तन हुआ, उसी प्रकार पूरे भारत में युवा कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन कर रहे हैं और देश में भी ऐसा ही परिवर्तन चाहते हैं।
जे.बी. पटनायक और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान।

1997 में जे.बी. पटनायक के मुख्यमंत्री रहते हुए कथित प्रश्नपत्र लीक के विरोध में बड़ा आंदोलन हुआ। उस समय एबीवीपी के नेता धर्मेंद्र प्रधान ने लगभग 1,500 छात्रों को एकत्र कर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च किया। पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में उन्हें गंभीर चोटें आईं।
कहा जाता है कि इस आंदोलन में उनके साहस को देखकर भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल किया और आगे बढ़ने का अवसर दिया। यह आंदोलन उनके राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

राजनीतिक नाटक

क्या आप जानते हैं कि वह कौन थे?
नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जिनके इस्तीफे की मांग आज राजनीतिक दल, जनता और छात्र कर रहे हैं, वे वही धर्मेंद्र प्रधान हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग इसे समय के बदलाव का एक उदाहरण बताते हुए यह पोस्ट साझा कर रहे हैं।टिप्पणी:
संलग्न तस्वीर 1997 के उस आंदोलन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद ली गई थी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों ने यह भी सवाल उठाया है कि विदेश में पढ़ रही धर्मेंद्र प्रधान की बेटी को भारत वापस क्यों नहीं बुलाया जाता। उनका कहना है कि क्या इससे यह संकेत मिलता है कि स्वयं धर्मेंद्र प्रधान भी यह मानते हैं कि भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं है?

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இரா. தேவேந்திரன்.

July 29, 2026

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